अनुभव की कमी नहीं है
मेरे माथे को पढ़ लो
तक़दीर की रेखाये
हाथो मे भी गड़ी है
कुछ कमतरी नहीं है
मेरी आँखों मे देखो
फिर हाथ यू पसारे
एक पेट ही है कारन
यह आग भी है अदभुद
दुनिया को है चलाती
यह फैसले है करती
तू दाता में भिखारी।
मेरे माथे को पढ़ लो
तक़दीर की रेखाये
हाथो मे भी गड़ी है
कुछ कमतरी नहीं है
मेरी आँखों मे देखो
फिर हाथ यू पसारे
एक पेट ही है कारन
यह आग भी है अदभुद
दुनिया को है चलाती
यह फैसले है करती
तू दाता में भिखारी।
23 अगस्त 2015
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