Saturday, 22 August 2015

लकीरे 230815

अनुभव की कमी नहीं है
मेरे माथे को पढ़ लो
तक़दीर की रेखाये
हाथो मे भी गड़ी है
कुछ कमतरी नहीं है
मेरी आँखों मे देखो
फिर हाथ यू पसारे
एक पेट ही है कारन
यह आग भी है अदभुद
दुनिया को है चलाती
यह फैसले है करती
तू दाता में भिखारी।
23 अगस्त 2015

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