मीरा!
क्या रिश्ता है
कान्हा से तेरा?
उसने कहा
साजन माना है मैंने
मेरे जन्मों का साथी।
मुझे हर ओर दिखता है
मेरी सब सुनता है
मुझे पार लगायेगा
भव सागर से।
क्यूँकर विरोध हुआ
उसकी इस बात का
क्यों अनेको मंसूबे बने
उसको दूर करने को,
कृष्ण से।
क्यों हम नहीं समझ सके
कब प्रेम,भक्ति बन गया
और भक्ति के सामने
प्रेम तुच्छ हो जाता है
हमेशा।
क्या रिश्ता है
कान्हा से तेरा?
उसने कहा
साजन माना है मैंने
मेरे जन्मों का साथी।
मुझे हर ओर दिखता है
मेरी सब सुनता है
मुझे पार लगायेगा
भव सागर से।
क्यूँकर विरोध हुआ
उसकी इस बात का
क्यों अनेको मंसूबे बने
उसको दूर करने को,
कृष्ण से।
क्यों हम नहीं समझ सके
कब प्रेम,भक्ति बन गया
और भक्ति के सामने
प्रेम तुच्छ हो जाता है
हमेशा।
ललित 14 सितम्बर 2015
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