वो और थी मैं और था
हम चल तो पड़े थे साथ साथ
यु जिंदगी को गुज़ारने
तिनको को यूँ जोड़ते
बांधते संवारते
अच्छाई भी बुराई भी
खुशियाँ भी गमी भी,
लड़ते झगड़ते
बहुत उसने की कोशिशे
कुछ हमने भी सहा तो था
बहुत वक़्त गुज़र गया
वक़्त भी अजीब था
यूँ ही गुज़र गया
आज इस मक़ाम पर
जब आइना नहीं पहचानता
टूटे हुए म्यार से
मुड़के जो हूँ देखता
एक बात वाज़े है
वो और थी मैं और था।
हम चल तो पड़े थे साथ साथ
यु जिंदगी को गुज़ारने
तिनको को यूँ जोड़ते
बांधते संवारते
अच्छाई भी बुराई भी
खुशियाँ भी गमी भी,
लड़ते झगड़ते
बहुत उसने की कोशिशे
कुछ हमने भी सहा तो था
बहुत वक़्त गुज़र गया
वक़्त भी अजीब था
यूँ ही गुज़र गया
आज इस मक़ाम पर
जब आइना नहीं पहचानता
टूटे हुए म्यार से
मुड़के जो हूँ देखता
एक बात वाज़े है
वो और थी मैं और था।
17 september 2015
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