कुछ आहट सी हुई थी
चौंक कर देखा
वहां कोई नहीं था,
हवा मे तेरी खुशबु तो थी
अहसास भी था तेरे यहाँ होने का
दिल के फर्श पर
तेरे पैरो के निशान अभी नम् थे
रुकते तो सही कुछ देर
मैं निहारता,समोता तुम्हे
भर लेता आपने घट में
पूर्ण हो जाता शायद
वो खला
जो रह गया है
तुम्हारे यूँ चुपचाप
उठ कर चले जाने से।
चौंक कर देखा
वहां कोई नहीं था,
हवा मे तेरी खुशबु तो थी
अहसास भी था तेरे यहाँ होने का
दिल के फर्श पर
तेरे पैरो के निशान अभी नम् थे
रुकते तो सही कुछ देर
मैं निहारता,समोता तुम्हे
भर लेता आपने घट में
पूर्ण हो जाता शायद
वो खला
जो रह गया है
तुम्हारे यूँ चुपचाप
उठ कर चले जाने से।
16 September 2015
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