mom125712
Friday, 18 September 2015
नींद 160915
कल रात नींद आई थी
चोखट पर मेरी
मैंने उसे स्वीकारा नहीं
अपनी आँखों में
जानता था कहीं दूर
दो आँखें ग़मगीन हैं
कैसे सो पाता मैं अकेला
जब जाग रहे थे तुम ।
Lalit 16 sep 2015
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