Friday, 18 September 2015

नींद 160915

कल रात नींद आई थी
चोखट पर मेरी
मैंने उसे स्वीकारा नहीं
अपनी आँखों में
जानता था कहीं दूर
दो आँखें ग़मगीन हैं
कैसे सो पाता मैं अकेला
जब जाग रहे थे तुम ।
Lalit 16 sep 2015

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