Monday, 21 September 2015

हीरा 200915

उसे तराश के हीरा बना दिया 'उदास'
सज गया है वो वहां,हमारी पहुँच से बाहर।
20 sep 2015

बारिश 2 200915

मन हर्षित हुआ
इस मौसम में
बारिश की फुहार
तेज़ ठंडी हवा
झूलते झूमते बड़े बड़े वृक्ष
पत्तो से टकरा कर बारिश के पानी की कल कल
कितना डरा देती होगी
उस पंछी को
जिसका घोंसला है उस पेड़ पर
20 sep 2015
8.10 am

बारिश 200915

सुबह सुहानी बारिश
तरो ताज़ा कर गई बहुत कुछ
मौसम ,वायु,मिटटी
और तेरी यादे.....
20 सितम्बर 2015
8 am

जन्म दिन 220915

आ जाता है है वो दिन
साल के बाद दोबारा
वो तारीख जिसकी प्रतीक्षा
मेरी माँ बहुत ख़ुशी से करती थी
कितनी ही त
तैयारियां होती थीं
नये कपड़े,खिलौने,मिठाई
दोस्तों को बुला कर
सूंदर से केक की कटाई
कुछ बड़ा होने पर
सब अजीब सा लगता था
मना कर देता था माँ को
समागम करने से
पर वो ज़िद कर
मना ही लेती थी मुझको यह कहकर कि
मैं नहीं हूँगी तो मत मनाना।
अब मेरे जनम दिन पर
रसमें निभाई तो जाती है
अजनबी चेहरे
अभिवादन भी करते है
पर वो भाव कहीं नहीं दिखता
जो होता था मेरी माँ की आँखों मे।
22 sep 2015

Friday, 18 September 2015

नींद 160915

कल रात नींद आई थी
चोखट पर मेरी
मैंने उसे स्वीकारा नहीं
अपनी आँखों में
जानता था कहीं दूर
दो आँखें ग़मगीन हैं
कैसे सो पाता मैं अकेला
जब जाग रहे थे तुम ।
Lalit 16 sep 2015

घर में अजनबी 170915

अपने ही घर मैं अजनबी हो जाता है कोई
अनजान चहरे ,वीरान आँखे
अपरिचित बोली,अंजाने ख्याल
इंट इंट लगा कर तामीर किया घर
हँसता है मुझपर,ज़ोर ज़ोर से
वो पसीना,वो खून बहाया किसके लिये
वोह जो अपनी ख्वाहिशो की कटौती की
किसी काम न आयी
सब चहरे अजनबी हिसाब मांगते है
उस लेख का,जिसमे उनका कोई जोड़ नहीं
जिंदिगी के नाम का यह मज़ाक
यु ही चलता रहा है सदियो से
यु ही चलता रहेगा हमेशा
मेरे साथ भी
मेरे बिना भी।
17 sep 2015

दो लाइन 170915

जाने क्यों ढूंढती रहती है ये आँखे उसको
जाने वोह कौन है जो जेहने सफ़र करता है।
Lalit 17 sep 2015

वो और थी 170915

वो और थी मैं और था
हम चल तो पड़े थे साथ साथ
यु जिंदगी को गुज़ारने
तिनको को यूँ जोड़ते
बांधते संवारते
अच्छाई भी बुराई भी
खुशियाँ भी गमी भी,
लड़ते झगड़ते
बहुत उसने की कोशिशे
कुछ हमने भी सहा तो था
बहुत वक़्त गुज़र गया
वक़्त भी अजीब था
यूँ ही गुज़र गया
आज इस मक़ाम पर
जब आइना नहीं पहचानता
टूटे हुए म्यार से
मुड़के जो हूँ देखता
एक बात वाज़े है
वो और थी मैं और था।
17 september 2015

Wednesday, 16 September 2015

आहट 160915

कुछ आहट सी हुई थी
चौंक कर देखा
वहां कोई नहीं था,
हवा मे तेरी खुशबु तो थी
अहसास भी था तेरे यहाँ होने का
दिल के फर्श पर
तेरे पैरो के निशान अभी नम् थे
रुकते तो सही कुछ देर
मैं निहारता,समोता तुम्हे
भर लेता आपने घट में
पूर्ण हो जाता शायद
वो खला
जो रह गया है
तुम्हारे यूँ चुपचाप
उठ कर चले जाने से।
16 September 2015

Tuesday, 15 September 2015

भेल का पत्ता

झूल रहा था हवाओ मे मैं,
इक डाल पर
तुमने सुना था ,शिव को पसंद है
बेल वृक्ष का पत्ता
तोडा मुझे ,औरो के संग
रख दिया
शिवालय के बाहर,
दूसरो के चढ़ाने के लिये
परोपकारी ओर दानी हो गये तुम
आते रहे, उठाकर देखते रहे
और वही छोड़ देते रहे,
अनेक भक्त
पर नहीं चढ़ाया मुझे शिवलिंग पर,
क्योंकि थोडा खंडित था मैं।
मेरी अपूर्णता भी तो उसकी थी,
वही तो रचयता है
पूर्ण और अपूर्ण का
जितनी मेरी चाह थी
उसे पाने की,
उतनी ही तड़प थी,
उसमे मुझे अपनाने की
और वो शिव दिन भर इंतज़ार मे
रहा मेरे,
कि सफ़र पूरा हो मेरा
उस परमात्मा से मिलने का
धन्य हो जाये  प्रभु
अपने भक्त को पाकर।

Monday, 14 September 2015

Sea shore 140915

Night fall,
Dimly lit hut
Shore of an ocean
Sand beneath the naked feet
Shorts and t-shirts
Color bands on forehead
Fresh sea food
Bloody red wine
I see nothing
But your eyes...
14 sep 2015

मीरा 140915

मीरा!
क्या रिश्ता है
कान्हा से तेरा?
उसने कहा
साजन माना है मैंने
मेरे जन्मों का साथी।
मुझे हर ओर दिखता है
मेरी सब सुनता है
मुझे पार लगायेगा
भव सागर से।
क्यूँकर विरोध हुआ
उसकी इस बात का
क्यों अनेको मंसूबे बने
उसको दूर करने को,
कृष्ण से।
क्यों हम नहीं समझ सके
कब प्रेम,भक्ति बन गया
और भक्ति के सामने
प्रेम तुच्छ हो जाता है
हमेशा।
ललित 14 सितम्बर 2015