Wednesday, 18 November 2015

रिफ्यूजी 2 141115

समुद्र तट पर तैर कर पहुँची यह लाश
मेरे जैसे ही किसी बाप के बेटे की है
किसी माँ ने जल्दी जल्दी मे पहनाये जो कपड़े
लम्बे सफ़र पर जाने के लिए
अच्छे भले घर मे जन्मा,खुशियों का पुलंदा
आँखों का तारा, राज दुलारा
यू औंदा पड़ा है रेत पर ,ढेर
निर्जीव
मानवता के हाथों बलि चढ़ि मानवता
अजब हो रहा है यह खेल
शरण ढूंढने निकला जो -परिवार के साथ
सुना था सूंदर दुनिया है,सूंदर सिरजनहार की
पर मौत पाई
धर्म,रंग,देश के नाम पर।
चेतो इंसानो, कुछ शर्म करो
मत सहो अत्याचार
मत करो अत्याचार
जिससे मानवता शर्मिंदा रहे
सदियो तक !

14 nov 2015


रावन 191015

कितना अच्छा लगता है तुम्हे
मुझे जलाकर हर साल
क्या साबित करना चाहते हो तुम
कह कर बुराई पे अच्छाई की जीत
कही कमतर पड़ गया था मैं
सदियो पहले राम के सामने
पर साल दर साल
आपने मन के अंदर छिपी बुराई को भुलाकर
दहन करते हो मेरा
और हो लेते हो खुश
झूठा ही
जानते हो तुम कि
रोज़ हारती है तुम्हारी अच्छाई बुराई से।
19 oct 2015

Birthday Eve 191015

My thoughts go out
To a house in an old city
Where many decades ago
Surrounded by family
A young woman
Was whining in pain
To bring to the world
Her first child.
Support and words
Could only be offered by all
The pain was her to bear
To God she could only call
In the numbing pain
She held on to believe
That she was doing her part
In the drama of life.
Was she ever repaid
For the turmoil .
Compensated in any way
For the days in pain
I don't think that happened
Did it go in vain?
My thoughts just wander
On my birthday eve.
19 oct 2015

जन्मों के यह रिश्ते 211015

चलो ले जाये तुमहें हम
किसी दूजे जहाँ में
जहाँ कोई जात न पूछे
ना पुछे क्योंकर तुम मेरे साथ रहते हो
क्योंकर तुम्हारी हर ख्याहिश मैं सर आँखों पे रखता हूँ
क्योंकर तुम मेरी आवाज़ को आज़ान कहते हो
मेरी सब झिड़कियों पे तुम मुस्कुराते हो
क्योंकर भरी दोपहर मे,नंगे पाँव जा कर
मेरी एक छोटी सी इच्छा के लिये सर जलाते हो
लड़ते हो झगडते हो मेरे हर कौल के पीछे
जिस कौल पर पूरा ऐतबार तुम भी नहीं करते
ना जाने ख्याब मे तुम क्या देख लेते हो
रातों को उठ कर फिर सजदे में रहते हो
यह है दिलो के रिश्ते इन्हे क्यों नाम देना है
ऐसा जहाँ मानो कही ज़रूर होगा
जहा दिल को चैन रूहो को सकून होता हो
आ जाओ संग मेरे ना बांधो लकीरो में
नहीं यह कौल है मेरा,कहा है कुछ फकीरो ने
रूहे साथ चलती है
है जन्मों के यह रिश्ते।
@ललित शर्मा 21 ओक्टूबर 2015

Refugee 271015

He who crossed the border into an unwelcoming city
scans the eyes of the aggressive natives
hoping to find a flicker of kindness in one
Don't hate him
Don't scorn him
He is not here by choice
Look closely
His blank expression was not always such
His stoned eyes are trying their best to hide a story
The story of his happy childhood
The story of his big mansions
The story of his large car
The story of now dead son
The story of the unslept nights
The story of wounded heart
Standing in queues to get some food
Stretching his hands to hold on to the old clothes you
donated so magnanimously
He wishes to use them to cover
some of the wounds humanity inflicted
Don't be shocked looking at him
He is in shock too
Shocked at the behaviour of his friends
Shocked at behaviour of his neighbours
Shocked to see the true nature of humanity
Yes you are suspicious of him
Threatened by his beliefs
His way of living are different than yours
He gave all up to be here
All that he treasured
All that he loved
To save his life
From an assassin
Whom he had once known as a friend
The face changed overnight
So he stands at your door
Do not judge him
He is not here by choice
Chased away from his homeland.
He is a refugee at your door.
@lalit 27 Oct 2015

तुम्हारा अहसास 011115

कहाँ रह पाता हूँ मैं अकेला
तुम यहीं तो होते हो आसपास
सुबह से शाम तक
मेरे साथ साथ हर जगह
कभी आराम कर लिया करो
मुझे छोड़ कर
मुश्किल हो जाता है
मेरे लिये भी
दिनभर ,सतर्क रहना
ध्यान रखना अपने हर व्यवहार का
कही चूक न जाऊं
कोई मात्रा लगाने में।
तुम भी तो थक जाते होगे
यूँ ध्यान रखते
दिन भर।
1 nov 2015

दीवाली 111115

दीवाली
अलग अलग मतलब है इस शब्द का सब के लिये
अलग अलग भाव है इसके
कहने सुनने मे अच्छा लगता है
'दीवाली मुबारक हो'
किसी के लिये खिलोने
किसी के लिये नये कपड़े
किसी के लिये मीठाई
बाजार मे लुभावने विज्ञापन
बार बार कुछ नया ख़रीदने का निमंत्रण
कुछ बड़ा और बड़ा
कुछ नया और बड़ा
दिये
लाइट्स
रोशनी
हज़ारो नेमते
दसो दिनों से चल रही दावते
जुआ शराब जशन
सोने चांदी से बने देवताओ का पूजन
कितना ही तो जर्ष और उल्लास है
जुड़ा हुआ इस त्यौहार से
इस शब्द से
पर इस शब्द को सुनकर कितना सेहर जाता है
एक पिता
जो आज सुबह निकला है घर से
कुछ रूपए कमानें को
कुछ भी कर लेगा
कोई काम देदो
बस आज शाम तक
ज़रूरत है उसकी
ताकि आँख मिला सके
आपने बेटे से
वापिस घर जाकर
जिसने कहा था सुबह उसे
दीवाली मुबारक पापा
शाम जल्दी आ जाना
सजे बाजार मैं
चलेंगे
पटाके और मिठाई लाने।
11 nov 2015