Wednesday, 18 November 2015

रावन 191015

कितना अच्छा लगता है तुम्हे
मुझे जलाकर हर साल
क्या साबित करना चाहते हो तुम
कह कर बुराई पे अच्छाई की जीत
कही कमतर पड़ गया था मैं
सदियो पहले राम के सामने
पर साल दर साल
आपने मन के अंदर छिपी बुराई को भुलाकर
दहन करते हो मेरा
और हो लेते हो खुश
झूठा ही
जानते हो तुम कि
रोज़ हारती है तुम्हारी अच्छाई बुराई से।
19 oct 2015

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