समुद्र तट पर तैर कर पहुँची यह लाश
मेरे जैसे ही किसी बाप के बेटे की है
किसी माँ ने जल्दी जल्दी मे पहनाये जो कपड़े
लम्बे सफ़र पर जाने के लिए
अच्छे भले घर मे जन्मा,खुशियों का पुलंदा
आँखों का तारा, राज दुलारा
यू औंदा पड़ा है रेत पर ,ढेर
निर्जीव
मानवता के हाथों बलि चढ़ि मानवता
अजब हो रहा है यह खेल
शरण ढूंढने निकला जो -परिवार के साथ
सुना था सूंदर दुनिया है,सूंदर सिरजनहार की
पर मौत पाई
धर्म,रंग,देश के नाम पर।
चेतो इंसानो, कुछ शर्म करो
मत सहो अत्याचार
मत करो अत्याचार
जिससे मानवता शर्मिंदा रहे
सदियो तक !
मेरे जैसे ही किसी बाप के बेटे की है
किसी माँ ने जल्दी जल्दी मे पहनाये जो कपड़े
लम्बे सफ़र पर जाने के लिए
अच्छे भले घर मे जन्मा,खुशियों का पुलंदा
आँखों का तारा, राज दुलारा
यू औंदा पड़ा है रेत पर ,ढेर
निर्जीव
मानवता के हाथों बलि चढ़ि मानवता
अजब हो रहा है यह खेल
शरण ढूंढने निकला जो -परिवार के साथ
सुना था सूंदर दुनिया है,सूंदर सिरजनहार की
पर मौत पाई
धर्म,रंग,देश के नाम पर।
चेतो इंसानो, कुछ शर्म करो
मत सहो अत्याचार
मत करो अत्याचार
जिससे मानवता शर्मिंदा रहे
सदियो तक !
14 nov 2015
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