Friday, 25 March 2016

नमक 090116

नमक  090116


सोचा, दर्द भरे मन से बात करू
पीड़ा को शब्दों मे ढाल दू
एक मार्मिक रचना करु
जहाँ एक एक शब्द खून के आँसुओ मे सराबोर हो।
चीख उठे हर मात्रा
ज़ोर से,
नहीं मेरी तरह खामोश रहे।
फिर सोचा,
दिल के ज़ख्म दिखने लगेगे
मुस्कुरा देगा कोई
कमजोरी देख कर
वो जो हाथ मे नमक लिये बैठा है
इन्ही ज़ख्मो के लिये।


9 jan 2016

थोडा ध्यान दिया करो 090116

थोडा ध्यान दिया करो   090116


थोडा तो ध्यान किया करो !
बड़ी मुश्किल से समेटता हू मै खुद् को
कण कण चुन कर
रखता हू तिनके पे तिनका
आंसुओ से जमाता हू यह रेत
पल पल जलाता हू खुदको
भुलाने के लिये
जो कहा था तुमने
तभी तो उठ पाता हू बड़ी मेहनत से,
और तुम
एक ही बात से
फिर ढेर कर देते हो मुझको।
थोडा तो ध्यान किया करो।


9 jan 2016

Thursday, 24 March 2016

शब्द कहा से आते है 090116

शब्द कहा से आते है   090116


बहुत दिनों से दोस्त कह रहे थे
कुछ लिखा नहीं आपने कई दिनों से
आज लिख डाला
तो चोंक गये।
मैं भी चोंक गया,
अहसास हुआ कि लिखने के लिये
स्याही की जगह
आंसू लगते है
खून के
तभी तो रंग आता है
शब्दों मे
और इन आंसुओ के लिये
घट घट भरता है अंतर्मन,
और जब बहुत भर जाये
तो छलक जाता है
आंसू बन कर
जो बन जाते है स्याही
उस कलम की
जहाँ से आते है शब्द
जिन्हे पढ़ कर
तुम आवाक् हो जाते हो।


9 jan 2016

Opinion 130116

I had always held the opinion that so called ram rahim was unfairly targeted by people who had political benifits to seek.He looked a joker and the news related to him, many a times was hilarious, to say the least.And his followers came out as misguided to say the least.But the action against kiku today has changed my perception.
Our courts need to vigilant about where we are heading.when a salman khan goes scot free after mowing down people and kiku goes in for hurting religious sentiments,serious thought is required to be given,where we are heading.
13 jan 2016

परायो से कहां गिले होते है। 090116

परायो से कहां गिले होते है।  090116



हा,यह सच है
दिल बहुत दुखा है
पर ज़ख्म दिखाऊंगा नहीं
सहलाने की तसल्ली नहीं बक्षुगा
आँख मे आंसू नहीं देख पायेगा तू
ना कोई नाराज़गी झलकेगी मेरी बातो से
नहीं दोहराउगा सुनी सुनी बाते
आज आगे बढ़ने का इरादा रखता हू
तोड़ के वो डोर जो हमको बांधे थी
गिला कोई तुमसे अब हो ही नहीं सकता
परायो से कहां गिले होते है।


9 jan 2016

तेरी एनायतै 090116

तेरी एनायतै  090116


कोशिश करूँगा ना भुला दू
तेरी इनयते
याद रखू तेरे सब एहसान
जो इतनी शिदत से किये तुमने
अपनी बैफकूफी से भूल जाता हू
कैसे वर्क़ दर वर्क फाड़ा तुमने
मेरी जिंदिगी की किताब को
कैसे जुदा किया उस सब से
जो मुझे सब से प्रिय था
कितनी आसानी से
तुम छुपाते रहे आपने झूठ
सब को झूठा कह कर
किस खूबसूरती से अपनी सब कमिया
छुपा ली,दूसरो की कमिया गिनवा के
और मैं
चलता गया
यह सोच कर की कभी तो समझोगे
कभी तोह पढ़ पाओगे
मेरी आँखों की उदासी
मेरे हर पनने के फटने का दर्द
पर आज सब व्यर्थ हो गया
किसी काम न आयी
मेरी वोह भूल जाने की कोशिश
ताकि जिंदिगी खुशगवार रहे
समझोते किसी काम ना आये
तुम ज्यु के तयु हो
चुप समझने मे असमर्थ
और मुझे अब कुछ कहना भी नहीं ।


9 jan 2016

दर्द 090116

हमको मालूम है
दर्द का खरीदार नहीं कोई
इसी लिये हम मसखरे बने फिरते है।
9 jan 2016

Butterfly effect 100116

Butterfly effect  100116


They say
that everything matters.
We are all connected.
Even the flutter of a butterfly
can cause a typhoon
on the other side of the world.
They call this the "Butterfly Effect".
How come you are not affected
When my heart explodes.


Taken undue liberty with a beautiful write by Nidhi,with apologies.


10 jan 2016

रौशनी 110116

रौशनी  110116


कहीं सुना था
"चिराग बुझ गये है तो हम जलाएंगे दिल को
वो और थे जो दिल को बुझा के बैठ गये।"
घनघोर अंधेरो मे
ना उम्मीदी मे
कोशिश भी बहुत की दिल जला के रौशनी करने की
दिल तो जलता रहा
पर रौशनी ना हुई।


11 jan 2016

It does take a toll 120116

It does take a toll 120116


Yes it does take a toll !
The times that I do not react
To the things that upset me,
The times that the tears
Do not drain away the pain
The times when i do not shout
In the name of civility
The times when a primitive in me
Wants to hit out hard
But waters it down to the twitch of the eye
The times the gone by years
Come back as a flashback
To re-knock on the withered walls of the heart
I try my best to assure myself in believing
That all is well...
Let not be fooled..
It does take a toll.

lalit 12 Jan 2016

लोहड़ी 2016 130116

लोहड़ी 2016   130116


एक पुराने दोस्त से गुफ्तगू हो गई
लोहड़ी के मौके पर।
वो जो कभी साथ रहा था
साथ खेला था
आज कही दूर बैठा है
साथ मनाये लोहड़ी के दिन ताज़ा कर दिये उसने
जब कई दोस्त दिन भर साथ बैठते थे
पतंगे उड़ाते थे
मिठाई का इंतजाम होता था
बहस होती थी,शरारत होती थी
कई दिनों से होती तैयारी
अंजाम चढ़ती थी
दिन का पता ही नहीं चलता था
शाम होते होते आग जलाई जाती थी
कोई घर जाना नहीं चाहता था..
फिर उसने भरे दिल से कहा
"लुधियाना जैसी लोहड़ी यहाँ नहीं होती"
अब उसे क्या बताऊ
जिस लोहड़ी को वो याद रखे है
वोह लोहड़ी अब यहाँ भी नहीं होती।


13 jan 2016

Stranger 160116

Stranger  160116


Chatting with strange men
Late into the night
Could be injurious!
Her defenses warn
But she plays along
Note by note
A symphony unfolds
Layer by layer
She uncovers her heart
Re-living her pain
Walking the path
She trusts her intuition
So she believes
There may be a reason
To meet a stranger.

lalit, 16 Jan 2016

Stepping stones 300116

Stepping stones  300116


In the walk called life
We encounter stepping stones
Flat hard surfaces
Which act as supports
Providing stability
Balance
A bit of rest,
once in a while
When it is most needed
they seem all important
Till
We raise our foot
To place on the next
They stay there
Remembering those moments
As memories
That fleeting touch
Of the feet
Was an important
Event
But for the walker
It was just another
Stepping stone...


Lalit 30 jan 2016

बावला मन 160216

बावला मन
उसी को खो कर परेशान है
जो हासिल था ही नहीं।
16 feb 2016

कुछ भी नहीं बदला 160216

कुछ भी नहीं बदला
आज भी तुम्हे
मुझ से प्यारे
तुम्हारे ख्वाब है।
16 फेब 2016

The roller coaster 160216

The roller coaster  160216


A day is a long time
When each moment counts
Amazing fleeting moments
The roller coaster
The high and the lows
So near
And yet so far
Now i could touch you
And can not
He must have a reason
Or so i believe


16 Feb 2016

भारी बाते 160216

भारी बाते  160216


कितनी आसानी से कह देते हो तुम
इतनी भारी बाते
बाते जो सोचने मैं भी
डर लगता है औरो को
कितनी साफ़ और सटीक
तुम्हारी सोच आर अभिव्यक्ति
दुयायै दे सकता हू
तुम वोह सब पायो
जिसका तुम तासावुर करो।


16 feb 2016

Yet again 160216

Yet again
U were so focused
Once upon a time
And today too
It is the same
It is best to part.

16 feb 2016

कह दो 230216

कह दो 230216



तुम कहते हो
शब्दों की ज़रुरत नहीं होती
समझ ही लेता है
एक
दूसरे की अनकही बात।
हज़ारो लोग
सदियिओ से
ऐसा ही सोचते आये है
और खो दिया
जो प्रिये था
इसी झिझिक में
पल पल गुज़रता समय
बीत रहा है तेज़ी से।
मत विश्वास करो चुप्पी पर।
फिर मौका ना मिले शायद
जो मन में है
कह ही देना चाहिए।


23 feb 2016

लकीरे 200216

तेरे चेहरे पे वक़्त ने जो लकीरें गढ़ी हैं
मेरी आँखों ने आयतें पढ़ी हैं

20 feb 2016

जाओ न छोड़ मुझे 110316

जाओ न छोड़ मुझे   110316


जाओ न छोड़ मुझे
बहक जाऊंगा अंधेरो मे।
बिखर जाऊंगा
तेज़ आंधी मे।
मैं जानता हूँ तुम्हारी मजबूरी
बहुत ज़रूरी है तुम्हारा
आगे बढ़ जाना।
तुम्हारा सफ़र है
तुम्हारा हक़ भी है।
जब कभी लौट इधर आओगे
तलाशे गी तुम्हारी नज़र मुझे
ना पाने का अफ़सोस मत करना
कहीं आँख नम हुई याद करके
तो यह सोचना कि मैंने कहा था
जाओ न छोड़ मुझे...

Lalit @11 mar 2016

शुक्रिया 120316

शुक्रिया  120316


तुम्हारी ही ज़िद थी
के मै अकेला रहूँ ।
बड़ी शिद्दत से माँगा था
तेरा साथ मैने
चाहा था सहारा
जिंदगी के सफ़र में
उन दिनों जब
शब्दों से ही टूट जाता था
कितने ही युद्ध
लड़ रहा था मैं
अकेला
मुड़ मुड़ कर तुझे खोजा था
पर तुम साथ नहीं थे
आज वक़्त के साथ
सब कुछ बदल गया है
अब उतने युद्ध नहीं होते
इतनी आसानी से
अब मैं बिखर नहीं जाता
मुड़ कर अब भी तुमको ढूँढता हू
एक नज़र भर की चाहत है
सहारे ढूँढता नहीं हूँ अब
तेरी ज़िद ने
अकेला चलना सीखा दिया
शुक्रिया शुक्रिया।


Lalit @12 mar 2016

Destiny 140316

Destiny 140316


All conscious effort
To run away
Have come to a naught
Destines are all powerful
Live them with a smile !

Lalit 14 mar 2016

हार 200316


हार  200316


डरे हुयों की बस्ती में
तुम अलख जगाने निकले हो!
जो जन्मों से मुर्दा है
उनको उठाने निकले हो!
तुमसे पहले कितने ही
हार गये इन लोगो से
यह ज़हर के आदी बैठे है
तुम अमृत पिलाने निकले हो!
घुटनो पे रेंगने को
यह जीवन समझे बैठे है
रीड़ इनकी गायब है
इन्हे दौड़ सिखाने निकले हो!
जिंदगी आसां करने को
जो जूठन पर पलते है
मुर्दो को जो खाते है
उन्हे शेर बनाने निकले हो!
यह डरते है तुमसे भी
डर ही इनकी फितरत है
यह तुमको मार गिरा देंगे
जिन्हे इंसान बनाने निकले हो!


Lalit 20 march 2016

जिंदिगी की किताब 200316

जिंदिगी की किताब  200316


ज़िन्दगी की किताब के पन्ने
पलट के देख ज़रा
हर्फ़ दर हर्फ़ दाखिल है
किस सफाई से
जो आज हो रहा है
जुड़ा है धागों से
कही बहुत पीछै
दूर माज़ी से।
रिसता सुलगता
जो तुमको दिखता है
बड़े सलीके से
मैंने संभाल रखा था
यह दर्द समेट के
संजोय रखा था
बांध के आज
सूंदर धागों से
दबा दिया है
सोंधी मिटटी मे
वक़्त के साथ
फिर अंकुर फूटेगे
लताये निकलेगी
जिंदिगी की किताब
के पन्नों से होते हुये
इनमे कभी फ़ूल महकेंगे
महक जो रूह को कभी छु जायगी
वहां बैठ कर माज़ी को जब तुम देखोगे
आज के दिन का पन्ना
बहुत कह देगा।


ललित,20 march 2016

होली 230316

होली  230316



रंगो का भी अजीब सा रिश्ता है मुझसे
कितना भी कोशिश करू
बे रंग रह जाता हू
मैं हर होली।
कभी माज़ी की कोई बात
हिला देती है ज़ेहन को
और कभी कुछ नया आ जाता है
किसी की न होने की कसक
सोख लेती है सभी रंग
और किसी का होना दिल दुखा जाता है
चाहता तो हू
रंगो से भर दूंगा यह साल होली को
पर उसको कुछ और ही भा जाता है।
अबके बरस कारन जुदा है
नतीजा वही,
यह होली भी बे रंग जायगी।


Lalit , 23 march 2016

A frozen heart 240316

A frozen heart  240316



A frozen heart..
Bereft of all warmth
How does it beat?
It is so true
U cannot change anyone
Whoever be it may
Wastage of moments
Wastage of years
A lifetime wasted
Spreading out chill
Killing happiness
Effecting all around
White blood
Energizing
A frozen heart!


Lalit,24 march 2016