Thursday, 24 March 2016

होली 230316

होली  230316



रंगो का भी अजीब सा रिश्ता है मुझसे
कितना भी कोशिश करू
बे रंग रह जाता हू
मैं हर होली।
कभी माज़ी की कोई बात
हिला देती है ज़ेहन को
और कभी कुछ नया आ जाता है
किसी की न होने की कसक
सोख लेती है सभी रंग
और किसी का होना दिल दुखा जाता है
चाहता तो हू
रंगो से भर दूंगा यह साल होली को
पर उसको कुछ और ही भा जाता है।
अबके बरस कारन जुदा है
नतीजा वही,
यह होली भी बे रंग जायगी।


Lalit , 23 march 2016

No comments:

Post a Comment