शुक्रिया 120316
तुम्हारी ही ज़िद थी
के मै अकेला रहूँ ।
बड़ी शिद्दत से माँगा था
तेरा साथ मैने
चाहा था सहारा
जिंदगी के सफ़र में
उन दिनों जब
शब्दों से ही टूट जाता था
कितने ही युद्ध
लड़ रहा था मैं
अकेला
मुड़ मुड़ कर तुझे खोजा था
पर तुम साथ नहीं थे
तुम्हारी ही ज़िद थी
के मै अकेला रहूँ ।
बड़ी शिद्दत से माँगा था
तेरा साथ मैने
चाहा था सहारा
जिंदगी के सफ़र में
उन दिनों जब
शब्दों से ही टूट जाता था
कितने ही युद्ध
लड़ रहा था मैं
अकेला
मुड़ मुड़ कर तुझे खोजा था
पर तुम साथ नहीं थे
आज वक़्त के साथ
सब कुछ बदल गया है
अब उतने युद्ध नहीं होते
इतनी आसानी से
अब मैं बिखर नहीं जाता
मुड़ कर अब भी तुमको ढूँढता हू
एक नज़र भर की चाहत है
सहारे ढूँढता नहीं हूँ अब
तेरी ज़िद ने
अकेला चलना सीखा दिया
सब कुछ बदल गया है
अब उतने युद्ध नहीं होते
इतनी आसानी से
अब मैं बिखर नहीं जाता
मुड़ कर अब भी तुमको ढूँढता हू
एक नज़र भर की चाहत है
सहारे ढूँढता नहीं हूँ अब
तेरी ज़िद ने
अकेला चलना सीखा दिया
शुक्रिया शुक्रिया।
Lalit @12 mar 2016
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