जाओ न छोड़ मुझे 110316
जाओ न छोड़ मुझे
बहक जाऊंगा अंधेरो मे।
बिखर जाऊंगा
तेज़ आंधी मे।
मैं जानता हूँ तुम्हारी मजबूरी
बहुत ज़रूरी है तुम्हारा
आगे बढ़ जाना।
तुम्हारा सफ़र है
तुम्हारा हक़ भी है।
जब कभी लौट इधर आओगे
तलाशे गी तुम्हारी नज़र मुझे
ना पाने का अफ़सोस मत करना
कहीं आँख नम हुई याद करके
तो यह सोचना कि मैंने कहा था
जाओ न छोड़ मुझे
बहक जाऊंगा अंधेरो मे।
बिखर जाऊंगा
तेज़ आंधी मे।
मैं जानता हूँ तुम्हारी मजबूरी
बहुत ज़रूरी है तुम्हारा
आगे बढ़ जाना।
तुम्हारा सफ़र है
तुम्हारा हक़ भी है।
जब कभी लौट इधर आओगे
तलाशे गी तुम्हारी नज़र मुझे
ना पाने का अफ़सोस मत करना
कहीं आँख नम हुई याद करके
तो यह सोचना कि मैंने कहा था
जाओ न छोड़ मुझे...
Lalit @11 mar 2016
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