Friday, 25 March 2016

नमक 090116

नमक  090116


सोचा, दर्द भरे मन से बात करू
पीड़ा को शब्दों मे ढाल दू
एक मार्मिक रचना करु
जहाँ एक एक शब्द खून के आँसुओ मे सराबोर हो।
चीख उठे हर मात्रा
ज़ोर से,
नहीं मेरी तरह खामोश रहे।
फिर सोचा,
दिल के ज़ख्म दिखने लगेगे
मुस्कुरा देगा कोई
कमजोरी देख कर
वो जो हाथ मे नमक लिये बैठा है
इन्ही ज़ख्मो के लिये।


9 jan 2016

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