Thursday, 24 March 2016

कह दो 230216

कह दो 230216



तुम कहते हो
शब्दों की ज़रुरत नहीं होती
समझ ही लेता है
एक
दूसरे की अनकही बात।
हज़ारो लोग
सदियिओ से
ऐसा ही सोचते आये है
और खो दिया
जो प्रिये था
इसी झिझिक में
पल पल गुज़रता समय
बीत रहा है तेज़ी से।
मत विश्वास करो चुप्पी पर।
फिर मौका ना मिले शायद
जो मन में है
कह ही देना चाहिए।


23 feb 2016

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