कह दो 230216
तुम कहते हो
शब्दों की ज़रुरत नहीं होती
समझ ही लेता है
एक
दूसरे की अनकही बात।
तुम कहते हो
शब्दों की ज़रुरत नहीं होती
समझ ही लेता है
एक
दूसरे की अनकही बात।
हज़ारो लोग
सदियिओ से
ऐसा ही सोचते आये है
सदियिओ से
ऐसा ही सोचते आये है
और खो दिया
जो प्रिये था
इसी झिझिक में
जो प्रिये था
इसी झिझिक में
पल पल गुज़रता समय
बीत रहा है तेज़ी से।
मत विश्वास करो चुप्पी पर।
बीत रहा है तेज़ी से।
मत विश्वास करो चुप्पी पर।
फिर मौका ना मिले शायद
जो मन में है
कह ही देना चाहिए।
जो मन में है
कह ही देना चाहिए।
23 feb 2016
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