Thursday, 24 March 2016

तेरी एनायतै 090116

तेरी एनायतै  090116


कोशिश करूँगा ना भुला दू
तेरी इनयते
याद रखू तेरे सब एहसान
जो इतनी शिदत से किये तुमने
अपनी बैफकूफी से भूल जाता हू
कैसे वर्क़ दर वर्क फाड़ा तुमने
मेरी जिंदिगी की किताब को
कैसे जुदा किया उस सब से
जो मुझे सब से प्रिय था
कितनी आसानी से
तुम छुपाते रहे आपने झूठ
सब को झूठा कह कर
किस खूबसूरती से अपनी सब कमिया
छुपा ली,दूसरो की कमिया गिनवा के
और मैं
चलता गया
यह सोच कर की कभी तो समझोगे
कभी तोह पढ़ पाओगे
मेरी आँखों की उदासी
मेरे हर पनने के फटने का दर्द
पर आज सब व्यर्थ हो गया
किसी काम न आयी
मेरी वोह भूल जाने की कोशिश
ताकि जिंदिगी खुशगवार रहे
समझोते किसी काम ना आये
तुम ज्यु के तयु हो
चुप समझने मे असमर्थ
और मुझे अब कुछ कहना भी नहीं ।


9 jan 2016

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