Wednesday, 18 November 2015

जन्मों के यह रिश्ते 211015

चलो ले जाये तुमहें हम
किसी दूजे जहाँ में
जहाँ कोई जात न पूछे
ना पुछे क्योंकर तुम मेरे साथ रहते हो
क्योंकर तुम्हारी हर ख्याहिश मैं सर आँखों पे रखता हूँ
क्योंकर तुम मेरी आवाज़ को आज़ान कहते हो
मेरी सब झिड़कियों पे तुम मुस्कुराते हो
क्योंकर भरी दोपहर मे,नंगे पाँव जा कर
मेरी एक छोटी सी इच्छा के लिये सर जलाते हो
लड़ते हो झगडते हो मेरे हर कौल के पीछे
जिस कौल पर पूरा ऐतबार तुम भी नहीं करते
ना जाने ख्याब मे तुम क्या देख लेते हो
रातों को उठ कर फिर सजदे में रहते हो
यह है दिलो के रिश्ते इन्हे क्यों नाम देना है
ऐसा जहाँ मानो कही ज़रूर होगा
जहा दिल को चैन रूहो को सकून होता हो
आ जाओ संग मेरे ना बांधो लकीरो में
नहीं यह कौल है मेरा,कहा है कुछ फकीरो ने
रूहे साथ चलती है
है जन्मों के यह रिश्ते।
@ललित शर्मा 21 ओक्टूबर 2015

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