Tuesday, 11 August 2015

गीत 120815

कुछ लिख देता हूँ
कोरे सफ़े पर मैं
कुछ शब्द बेमानी से
समेट हवाओ से
तुम अच्छा कहते हो
मुझे अच्छा लगता है
पर लिखा कहाँ मैंने
बस तुमको देखा था
कहीं दूर फिज़ाओ में
छू लेने को तुम को
बस हाथ बढ़ाया था
ये शब्द उभर आये
यू कोरे कागज़ पे
बस तुम ही तुम हो
सब मेरी नज्मो मैं
एक गीत अधूरा सा
कभी पूरा कर जाओ
ललित 12 अगस्त 2015

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