कोई चाहता है
कि दर्द के पैगाम ना निकलें,
खुशी ही खुशी
बहे, मेरी कलम से
चाहता है शब्द
नृत्य करते हुये
उल्लास करते हुए
रंग बिरंगे
खिले हुए
खुशबु बिखेरते हुए
बिछ जाए
बिखेर दे खुशियां
हर तरफ।
पर शब्द
कब किसी का
कहना मानते हैं।
वो तो
दिल कि आवाज
बिखेर देते हैं।
जो अन्दर है
रौशन कर देते हैं
जग को
नहीं फिक्र करते
किसी की चाहत की।
तुम ही नही
मैं भी
अवाक्
रह जाता हूँ
उन्हें बेरंग देखकर।
कि दर्द के पैगाम ना निकलें,
खुशी ही खुशी
बहे, मेरी कलम से
चाहता है शब्द
नृत्य करते हुये
उल्लास करते हुए
रंग बिरंगे
खिले हुए
खुशबु बिखेरते हुए
बिछ जाए
बिखेर दे खुशियां
हर तरफ।
पर शब्द
कब किसी का
कहना मानते हैं।
वो तो
दिल कि आवाज
बिखेर देते हैं।
जो अन्दर है
रौशन कर देते हैं
जग को
नहीं फिक्र करते
किसी की चाहत की।
तुम ही नही
मैं भी
अवाक्
रह जाता हूँ
उन्हें बेरंग देखकर।
@ललित शर्मा
27 Jan 2015
27 Jan 2015
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