क्या अच्छा है
लिख देना
जो मन में आये!
भावनाओ को
चाहतो को
परेशाननियो को
खुशियों को
हैरानियो को
मुझे पता नहीं'
परन्तु
जब दशको बाद
दोबारा पढते' है हम
अपना लिखा
फिर लौट आते है
वो पल
आपने सब वैभव में
जैसे कांटे निकल आये हो
एकाएक
फूलो की टहनी पर
लम्बे नुकीले कांटे
भेदते हुए दिल को
झुन्जुनाते हुये दिमाग को
अचानक
वापस ले जाते है
उन्ही हालातो में
जिन्हे सोचता था
बहुत पीछे छोड़ आया हू
अच्छा ही है
जिंदा हो जाता है
वोह रिश्ता
उन लोगों के साथ
जो छोड़ गये है मुझे
हमेशा के लिये !
अच्छा ही है !
लिख देना
जो मन में आये!
भावनाओ को
चाहतो को
परेशाननियो को
खुशियों को
हैरानियो को
मुझे पता नहीं'
परन्तु
जब दशको बाद
दोबारा पढते' है हम
अपना लिखा
फिर लौट आते है
वो पल
आपने सब वैभव में
जैसे कांटे निकल आये हो
एकाएक
फूलो की टहनी पर
लम्बे नुकीले कांटे
भेदते हुए दिल को
झुन्जुनाते हुये दिमाग को
अचानक
वापस ले जाते है
उन्ही हालातो में
जिन्हे सोचता था
बहुत पीछे छोड़ आया हू
अच्छा ही है
जिंदा हो जाता है
वोह रिश्ता
उन लोगों के साथ
जो छोड़ गये है मुझे
हमेशा के लिये !
अच्छा ही है !
ललित @ 11 june 2015
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