Monday, 10 August 2015

लिखता नहीं हू 250415

तुम कहते हो
"कुछ लिखते क्यों नहीं
बहुत दिन हुए
कुछ लिखा नही तुमने "
लिखा नहीं
क्योकि डरता हूं,
जो छुपाए हुए हू
अपने अंदर
बाहर आ जाएगा
घबरा जाओगे तुम
इतनी कालिख देखकर,
सह नहीं पाओगे
बहता हुआ जहर,
जो बिछ जाएगा
शब्द बन कर
कागज पर
मुझे आपने बिखरने का
कोई डर नहीं है।
टूट जाओगे तुम
देख कर कि
बेकार गई तुम्हारी सब कोशिशे
मुझे संभाले रहने की
मुझे समेटे रहने की
मुझे रोके रहने की
ढैह जाने से...
बस ये ही कारण है
मैं कुछ दिनों से लिखता नही हूँ।

25 अप्रैल 2015

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