Monday, 10 August 2015

तुम्हारे नाम 280615

तेरी सब कोशिशे नाकाम नहीं हुई
तुम्हारे अहम ने बहुत कुछ तोड़ा है
मेरे इस दिल की क्या बात करू
कई ज़िन्दिगियो के है इलज़ाम तुझ पर
कई मिट गये ,कई मिट रहे है ,ध्यान तो दो
ज़रा आसपास नज़र फेरो
जो चले थे साथ,आज कहीं भी नहीं
कौन कहाँ छूटे तुम क्या जानो
थोड़ा संब्लो,थोड़ा रहम करो।
@lalit 28 june 2015

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