Monday, 10 August 2015

कैसे लिखू 180714

मेरा भी दिल चाहता है 
मै लिखू 
अौरो की तरह 
खूबसूरत शब्दों की
माला बिखेर दू 
महक उठे अांगन
खुशबू हो चारो अौर
ऐक ऐक शब्द
पुकारता हो।
उड़ेल डालू
वो सब कुछ
जो दबा कर
रखा है दिल में।
फिर सोचता हूँ
कही यू ना हो
दबे दबे दिल के अंदर
जो पड़ा है, सालों से
दबा कुचला
सड़ ना गया हो।
डर ना जाए दुनिया
घबरा ना जाए
बदबू से
सड़न से
बस यही सोच कर
मैं रूक जाता हूँ।
नहीं लिखता कुछ
नही खोलता
दिल का दरवाजा
दबा ही रहता है
अंदर
जो गुबार भरा है।

18 जुलाई 2014

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