Monday, 10 August 2015

नील कंठ 040515

जरूरी नहीं के
नीला हो जाये
हर कंठ
जो ज़हर पीता है
ध्यान से देखो 
आसपास,हर और
हज़ारो विष के प्याले
पिये है
अनगिनत
ज़हर के घूट,
निगले है
इंसान ने
जीने को
कमाने को
दो वक़्त की रोटी
लाने को
अपने बच्चे के
चहरे पे ख़ुशी
और एक तुम
जो अमर हो गये
विष पी कर
कंठ नीला कर के
नील कंठ कहला कर .
@ललित ,4 may 2015

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