जरूरी नहीं के
नीला हो जाये
हर कंठ
जो ज़हर पीता है
ध्यान से देखो
आसपास,हर और
हज़ारो विष के प्याले
पिये है
अनगिनत
ज़हर के घूट,
निगले है
इंसान ने
जीने को
कमाने को
दो वक़्त की रोटी
लाने को
अपने बच्चे के
चहरे पे ख़ुशी
और एक तुम
जो अमर हो गये
विष पी कर
कंठ नीला कर के
नील कंठ कहला कर .
नीला हो जाये
हर कंठ
जो ज़हर पीता है
ध्यान से देखो
आसपास,हर और
हज़ारो विष के प्याले
पिये है
अनगिनत
ज़हर के घूट,
निगले है
इंसान ने
जीने को
कमाने को
दो वक़्त की रोटी
लाने को
अपने बच्चे के
चहरे पे ख़ुशी
और एक तुम
जो अमर हो गये
विष पी कर
कंठ नीला कर के
नील कंठ कहला कर .
@ललित ,4 may 2015
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