Monday, 10 August 2015

गुजर गया जो समय 200615

फिर से कुछ भी शुरू नहीं होता
गुजर गया जो समय
बीत गये जो पल
वापस कभी आते नहीं
कितनी भी कोशिश करें हम 
नयी शुरुआत की
तुम कहा तुम हो
मैं कहा मैं हूँ
उन पलों को याद करके
दुखी हुआ जा सकता है
रोया जा सकता है
अपनी गलतियों पर
फिर से शुरूआत नहीं हो सकती
क्योंकि बिछड़ गये है कुछ लोग
यहां पहुंचने में,
जो साथ थे हमारे
उस शुरूआत के वक्त।
और वो भी तो है,
जिनका नामोनिशान नहीं था तब
आज अहम हिस्सा है
मेरी और तुम्हारी जिंदगी का।
अरे छोड़ो ये शुरुआत की बातें
चलो कोशिश करें
अब से
नहीं दिल दुखाए
एक दूसरे का,
ताकि बरसों बाद
शरमिंदा ना होना पड़े
इन दिनों को याद करके।
@ललित, 20 june 2015

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