कोई कैसे लिख सकता है
हाशिओ मे सिमट कर
जब भाव वही है
तो शब्द भी वैसे ही होंगे
कहाँ से लाओगे झूठ के पुलिंदे
जो सुनने में अच्छे लगे
पर दिल से न बहें
छोड़ो ऐसी कोशिशो को
स्वच्छ मन से
अवत्रित बहने दो धारा
जो छु ले दिलो को
शब्दों से नहीं
भाव से।
हाशिओ मे सिमट कर
जब भाव वही है
तो शब्द भी वैसे ही होंगे
कहाँ से लाओगे झूठ के पुलिंदे
जो सुनने में अच्छे लगे
पर दिल से न बहें
छोड़ो ऐसी कोशिशो को
स्वच्छ मन से
अवत्रित बहने दो धारा
जो छु ले दिलो को
शब्दों से नहीं
भाव से।
Lalit 8aug 2015
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