Wednesday, 1 June 2016

चाय पे आ जाओ 010616

चाय पे आ जाओ  010616


आओ चाय पिलाये।
कुछ देर खामोश बैठ
कही अनकही बाते दोहराये,
आँखों के दरीचों से
झांक कर
मन के आईने पे पड़ी
छोटी बड़ी खराशे देखे
महसूस करे
वो जो गुजरा था
तुम्हारे और मेरे साथ
बरसो पहले
या अभी हाल मे
मैं भी समझ लूंगा
तुम्हारी ख़ामोशी
जैसे तुम समझ लेते हो मेरी
बिन कहे
यही तो खींचता है
मुझे
तुम्हारी और,
और तुम कारन ढूंढते रहते हो
मेरे यहाँ होने का...


Lalit ,1 june 2016

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