वहम 080416
मैं जानता हू
तुम वहम हो मेरा
सच से कोसो दूर
वहम जो अच्छा लगता है
मन को।
तुम्हारा नाम
ज़हन मे
इक उम्मीद जगाता है
और मैं डूब जाता हूँ
सपने बुनने में
हज़ारो रंगो के सपने
ढूँढता फिरता हू
तने से तने को मिलाता
जो गवाही दे
हमारे सम होने की
दूर पीछै मुड़ कर देखता हू
कही मिल जाये
मेरी परछाई तेरी परछाई से
या कोई रेखा दिख जाये
जो जोड़ रही हो हमे कही अतीत मे
तुम्हारा नाम
ज़हन मे
इक उम्मीद जगाता है
और मैं डूब जाता हूँ
सपने बुनने में
हज़ारो रंगो के सपने
ढूँढता फिरता हू
तने से तने को मिलाता
जो गवाही दे
हमारे सम होने की
दूर पीछै मुड़ कर देखता हू
कही मिल जाये
मेरी परछाई तेरी परछाई से
या कोई रेखा दिख जाये
जो जोड़ रही हो हमे कही अतीत मे
पर वहम, वहम होते है
सच्चाई से कोसो दूर!
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सच्चाई से कोसो दूर!
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ललित 8 अप्रैल 2016
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