कितने गलत थे तुम 280616
कितने गलत थे तुम।
किसी बीते युग की बात
अब सच नहीं होती
इस जिंदिगी के लिये तो
कुछ सिखाया ही नहीं
तुमने
और बीच मझदार छोड़ गये
उस मजमून की तैयारी के साथ
जो वैद्य ही नहीं था
इस जिंदिगी मे
झूठ और मक्कारी
सिखाई ही नहीं
और मैं आवाक् रह गया
सब अलग देख कर।
तुम जो कहते थे
सब अच्छा ही होगा
तुम जो कहते थे
सब अच्छे ही होते है
अच्छाई से बुराई को हराया जा सकता है
बस हमे सही रास्ते पे चलना चाहिये,
बस हमे सही रास्ते पे चलना चाहिये,
कितने गलत थे तुम।
किसी बीते युग की बात
अब सच नहीं होती
इस जिंदिगी के लिये तो
कुछ सिखाया ही नहीं
तुमने
और बीच मझदार छोड़ गये
उस मजमून की तैयारी के साथ
जो वैद्य ही नहीं था
इस जिंदिगी मे
झूठ और मक्कारी
सिखाई ही नहीं
और मैं आवाक् रह गया
सब अलग देख कर।
ललित ,28 जून 2016
No comments:
Post a Comment