सूली और सिंहासन 010416
अबकी बार फिर वही हुआ
जो होता आया है सदियो से
अलग अलग होते है
सूली पे चढ़ने वाले
और सिंहासन पाने वाले
दिल और दिमाग के इस खेल मे
दिल हमेशा हारता ही है
झूल जाता है फंसिओ पे
पी जाता है विष के प्याले
गोलियां खा लेते है
देश के नाम पर
वार देते है जिंदिगी
उसूलो पर
और दिमाग वाले नदारद मिलते है
घटना स्थल से
लौटने के लिये
हक़ जताने को
विजारतो पर।
दिल और दिमाग के इस खेल मे
दिल हमेशा हारता ही है
झूल जाता है फंसिओ पे
पी जाता है विष के प्याले
गोलियां खा लेते है
देश के नाम पर
वार देते है जिंदिगी
उसूलो पर
और दिमाग वाले नदारद मिलते है
घटना स्थल से
लौटने के लिये
हक़ जताने को
विजारतो पर।
Lalit 1 april 2016
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