पिया मिलन की आस 010516
सागर किनारे बैठ कर
देखू गगन विशाल
छोड़ू यह संसार अब
पिया मिलन की आस
बहुत गुज़रे दिन यहाँ
नृत्य किये हज़ार
तोडू सारे बंधन
जाऊ पिया के पास
ना कासु की चाकरी
ना झूठ का खेल
मिलू उससे पार मैं
टूटे मोह और सांस
साई इस संसार मे
गुज़ारे बहुत दिन
कुछ सीखे कुछ ना सिखें
क्या वक़्त तुम्हारे बिन
उस पार मैं आऊंगा
यह तो है विश्वास
देना देवा शांति
जब छूटे तन से साँस।
नृत्य किये हज़ार
तोडू सारे बंधन
जाऊ पिया के पास
ना कासु की चाकरी
ना झूठ का खेल
मिलू उससे पार मैं
टूटे मोह और सांस
साई इस संसार मे
गुज़ारे बहुत दिन
कुछ सीखे कुछ ना सिखें
क्या वक़्त तुम्हारे बिन
उस पार मैं आऊंगा
यह तो है विश्वास
देना देवा शांति
जब छूटे तन से साँस।
ललित 1 मई 2016
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