कुछ धागे तोड़े ही अच्छे होते है 070416
उन्मीदे रखनी नहीं चहिये
टूट जाने पे दुःख देती है
हर कोई अपनी ही कशमकश मे गुम है
लड़ रहा है भीतर और बाहर
अनगिनत छोटे बड़े युद्ध
कभी जीत की ख़ुशी
भर देती है उन्माद से
कभी हार का गम
बिठा देता है सब छोड़ कर
कई बार कितनी ही
लड़ाईया लड़ते हुये
होना पड़ता है उसे खड़ा
सब भूल कर
समेट कर खुद को
किसीको दिखाने के लिये
कि वोह अभी एक है
टूट के बिखरा नहीं है
कुछ अभिनय करने पड़ते है दूसरो के लिये
किसी की उन्मीदो को टूटने से बचाने के लिये
और वो सहारा बन जाता है कभी जीने का।
पर अच्छा किया जो तुमने समझ लिया
माफ़ कर दिया मेरी कमज़ोरी को
मुक्त कर दिया उस ऋण से जो जोड़े बैठा था हमे
कुछ धागे तोड़े ही अच्छे होते है।
कभी जीत की ख़ुशी
भर देती है उन्माद से
कभी हार का गम
बिठा देता है सब छोड़ कर
कई बार कितनी ही
लड़ाईया लड़ते हुये
होना पड़ता है उसे खड़ा
सब भूल कर
समेट कर खुद को
किसीको दिखाने के लिये
कि वोह अभी एक है
टूट के बिखरा नहीं है
कुछ अभिनय करने पड़ते है दूसरो के लिये
किसी की उन्मीदो को टूटने से बचाने के लिये
और वो सहारा बन जाता है कभी जीने का।
पर अच्छा किया जो तुमने समझ लिया
माफ़ कर दिया मेरी कमज़ोरी को
मुक्त कर दिया उस ऋण से जो जोड़े बैठा था हमे
कुछ धागे तोड़े ही अच्छे होते है।
शुक्रिया!
Lalit 7 april 2016
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