Thursday, 30 June 2016

बस अब जाने दो. 130616

बस अब जाने दो.130616


वो जो समझते है
रोक लेंगे उसे
प्यार से
गुस्से से
या
धमका कर,
नहीं जानते उसे।
कब ढला है वो सांचो मे
कब मानी है उसने किसी की
अकेला की खड़ा पाया गया वोह हमेशा
जन्मों दर जन्मों से
इस जनम मे क्यों कुछ अलग होता।
तुम जो
हक समझते हो उसपर,
तुम्हारा प्यार है
और प्यार का ऋण नहीं होता
छोड़ दो
जाने दो उसे
उस पार
जहाँ जन्मों से
कई प्यार पनपे
फना हो जाने के लिये।
पर बदला तो कुछ भी नहीं
जन्मों से।
बस अब जाने दो..
Lalit, 13 june 2016

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