Monday, 13 June 2016

तेरे बिना मैं अधूरा हू 260516

 तेरे बिना मैं अधूरा हू   260516


तू कितना लाज़िम है मेरे लिये
तेरे बिना मैं अधूरा हू
कितना निष्क्रिय हो जाता हू
शान्त खुश ठहरा सा
न कुछ लिख पाता हू
न कह पाता हू
और फिर बवंडर की तरह
सब तहस नहस कर देते हो
तिनका तिनका बिखर जाता हू
सिहर उठता हू
जाग जाता हू
झूठी नींद से
हाथ बड़ा कर
समेटना चाहता हू
सब तिनके जो उड़ रहे है
तुम्हारी मेहरबानी से
इन को समेट कर
फिर शुरू करता हू ताबीर
एक घरोंदे की
कहने लगता हू
लिखने लगता हू
शिद्दत से
फिर दोहराया जायगा
यही कुछ
जब फिर तुम आओगे आवेग से
मुझे पूरन करने
क्योंकि तुम्हारे बिना मैं
अधूरा हू।


ललित ,26 मई 2016

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