आजाओ प्रिये 070516
लिखते वो अच्छा है!
यह जग जाहिर है
एक एक शब्द भावनाओ से भरा हुआ
दिल की हर टीस को
उतार देते है कागज़ पर
मार्मिक चित्रण
दिल के वेग़ो का
आस पास से चिंतित
सब के दुखों मे दुखी
क्या अंदाज़ है।
वो किस खूबसूरती से
ढाढस बंधाते हैं
मलहम लगाते हैं
औरो के ज़ख्मो पर
मुस्कुराते हुए।
ज़ख्म कही कोई
बहुत ही गहरा है
जिससे ऊगा है यह
पौधा
महकते फूलों का
खुशबू तेरे मन की
हर ओर ही फैली है
महके हैं सभी वो भी
जिस जिस को छुया है।
मार्मिक चित्रण
दिल के वेग़ो का
आस पास से चिंतित
सब के दुखों मे दुखी
क्या अंदाज़ है।
वो किस खूबसूरती से
ढाढस बंधाते हैं
मलहम लगाते हैं
औरो के ज़ख्मो पर
मुस्कुराते हुए।
ज़ख्म कही कोई
बहुत ही गहरा है
जिससे ऊगा है यह
पौधा
महकते फूलों का
खुशबू तेरे मन की
हर ओर ही फैली है
महके हैं सभी वो भी
जिस जिस को छुया है।
आजा कभी यूँ ही
कुछ देर अकेले मे
बैठ ,बतियाते हैं
उस छुपे घाव पर भी
कोई मलहम लगाते हैं
कुछ देर अकेले मे
बैठ ,बतियाते हैं
उस छुपे घाव पर भी
कोई मलहम लगाते हैं
तुम कब मानोगे
क़ि ऐसा हो सकता है
जो रोग छिपा सब से
वो भी रो सकता है
चीखे सुनी मैने
जब तुम हंसते थे
क़ि ऐसा हो सकता है
जो रोग छिपा सब से
वो भी रो सकता है
चीखे सुनी मैने
जब तुम हंसते थे
आजाओ पार यहाँ
फिर मिल बैठेंगे
जब दिल की कह दोगे
सब भार मिट जाएगा
जो फटा है बरसो से
वो ज़ख्म सिल जाएगा
p
आजाओ पार प्रिये।
फिर मिल बैठेंगे
जब दिल की कह दोगे
सब भार मिट जाएगा
जो फटा है बरसो से
वो ज़ख्म सिल जाएगा
p
आजाओ पार प्रिये।
Lalit 7 may 2016
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