लड़की 280916
हा यह बात पुरानी है
मेरे घर के पहलू में
इक छोटा सा बच्चा रहता था
सब की तरह आपने माँ बाप को प्यारा था
खेलता था,पढ़ता था
शरारत भी वोह करता था
बड़ा होने के साथ
नज़ाकत भी तो आनी थी
वोह भी वक़्त आया
जिसको कहते जवानी थी
कोई मचली होंगी चाहते
कोई दिल मे बसा होगा
छुप छुप के मिलने का दौर भी चला होगा।
नन्ही सी उम्र मे
जन्मों की बात करता है
जो हुआ न यहाँ हासिल
उसे जन्म दर जन्म पाने की बात करता है
दायरे दुनिया के,
कितना मजबूर करते है
जिसे दिल ने चाहा हो
उसी से दुनिया दूर् करती है।
झूठी आन झूठी शान की खातिर
किसी से दूर रहने को मजबूर करती है।
मेरे घर के पहलू में
इक छोटा सा बच्चा रहता था
सब की तरह आपने माँ बाप को प्यारा था
खेलता था,पढ़ता था
शरारत भी वोह करता था
बड़ा होने के साथ
नज़ाकत भी तो आनी थी
वोह भी वक़्त आया
जिसको कहते जवानी थी
कोई मचली होंगी चाहते
कोई दिल मे बसा होगा
छुप छुप के मिलने का दौर भी चला होगा।
नन्ही सी उम्र मे
जन्मों की बात करता है
जो हुआ न यहाँ हासिल
उसे जन्म दर जन्म पाने की बात करता है
दायरे दुनिया के,
कितना मजबूर करते है
जिसे दिल ने चाहा हो
उसी से दुनिया दूर् करती है।
झूठी आन झूठी शान की खातिर
किसी से दूर रहने को मजबूर करती है।
मुझे दुःख है
जो मैंने होते देखा है
दुआ है,
मिले उसको जो उसने चाहा है।
उस रूह की किलकारीया फिर सुनना चाहता हू
उस बच्चे के चेहरे पर फिर मुस्कान चाहता हूँ।
जो मैंने होते देखा है
दुआ है,
मिले उसको जो उसने चाहा है।
उस रूह की किलकारीया फिर सुनना चाहता हू
उस बच्चे के चेहरे पर फिर मुस्कान चाहता हूँ।
28 sep 2016
No comments:
Post a Comment