Tuesday, 4 October 2016

किसे ढून्ढ रहे हो .. 280916

किसे ढून्ढ रहे हो .. 280916


हा,कोई मर गया है !
वो ही जिसे तुम ढूंढ रहे हो
यू हैरान मत हो।
तुमने ही तो मारा है,
कितना नीचे गाड़ा था
की कोई आवाज़ न निकले
अब आवाज़ ढूंढ रहे हो
इस मुर्दे मे।
मैं तो कहता था
अनजान हो तुम
जिंदिगी की हकीकतों से
जिंदिगी किसी को पूर्ण नहीं मिलती
कुछ पाने को,कुछ खोना पड़ता है
और कई बार
खो तो जाता है,बहुत कुछ
पर कुछ हासिल नहीं होता।
खुद को ही देख लो,
क्या हासिल हुआ,तुम्हे
मुझे मिटा कर।


28.sep 2016

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