तुम्हारे लिये। 270916
हा।
मेरे शब्दों पे पहला हक तुम्हारा था
तुमने ही तो उकसाया था
लिख देने को
जो उठता था मेरे मन मे
तुमने ही तो
सराहा था
जूठ मूठ,
अच्छा कह कर
वो जो
बेकार था
मेरी और दुनिया की आँखों मे
तुम्हारे इन्ही सहारो से
कदम दर कदम
चल कर पहुंचा हू यहां।
यहाँ,
जहाँ लोग तारीफ करते है
मेरे इज़हार की।
पर देखो
अब मैं तुमसे नहीं बांटता
सब कुछ
ऐसा न होता तो अच्छा था
पर यू ही है
अब मेरे भाव
तकलीफ देते है तुझको
ख़ुशी तलाशते हो
शब्दों मे मेरे।
ख़ुशी तो कभी भी नहीं थी
मेरी अभिव्यक्ति मे।
पर तब तुम
नहीं चाहते थे
निंयत्रित करना।
मेरे शब्दों पे पहला हक तुम्हारा था
तुमने ही तो उकसाया था
लिख देने को
जो उठता था मेरे मन मे
तुमने ही तो
सराहा था
जूठ मूठ,
अच्छा कह कर
वो जो
बेकार था
मेरी और दुनिया की आँखों मे
तुम्हारे इन्ही सहारो से
कदम दर कदम
चल कर पहुंचा हू यहां।
यहाँ,
जहाँ लोग तारीफ करते है
मेरे इज़हार की।
पर देखो
अब मैं तुमसे नहीं बांटता
सब कुछ
ऐसा न होता तो अच्छा था
पर यू ही है
अब मेरे भाव
तकलीफ देते है तुझको
ख़ुशी तलाशते हो
शब्दों मे मेरे।
ख़ुशी तो कभी भी नहीं थी
मेरी अभिव्यक्ति मे।
पर तब तुम
नहीं चाहते थे
निंयत्रित करना।
और अब
मुझे दोष न देना
तुम ही समझ लेना
क्यों छुपाने लगा हू
तुमसे
तुम्हरे लिये लिखे गये शब्द।
मुझे दोष न देना
तुम ही समझ लेना
क्यों छुपाने लगा हू
तुमसे
तुम्हरे लिये लिखे गये शब्द।
27 sep 2016
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