बहुत सोचा है मैंने
क्यों आता हू तेरी राहो में?
वो जो सवाल तुम मुझ से करती हो
मैंने भी पूछै है खुद से।
क्या कारण है
जो पूछता रहता हू
यू ही फालतू से सवाल
बे मतलब,बे वजह।
सवाल, जो तुम भी जानती हो
कोई मायने नहीं रखते
फिर भी जवाब दे देती हो
रटा रटाया ,मन रखने को।
तुम खोजना चाहती हो
कोई कारन मिल जाये
मेरा ऐसा करने का
मैं भी ढूंढ रहा हू
कारन मेरा ऐसा होने का,
शायद हर सवाल का जवाब नहीं होता
शायद कुछ रिश्ते अकारण ही होते है।
क्यों आता हू तेरी राहो में?
वो जो सवाल तुम मुझ से करती हो
मैंने भी पूछै है खुद से।
क्या कारण है
जो पूछता रहता हू
यू ही फालतू से सवाल
बे मतलब,बे वजह।
सवाल, जो तुम भी जानती हो
कोई मायने नहीं रखते
फिर भी जवाब दे देती हो
रटा रटाया ,मन रखने को।
तुम खोजना चाहती हो
कोई कारन मिल जाये
मेरा ऐसा करने का
मैं भी ढूंढ रहा हू
कारन मेरा ऐसा होने का,
शायद हर सवाल का जवाब नहीं होता
शायद कुछ रिश्ते अकारण ही होते है।
10 oct 2015
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