दिसंबर 261216
कुछ बात है
दिसंबर के इन दिनों मे
मन के भाव भी
मौसम की तरह
बदलते रहते है
कभी शोख हो जाते है
सुनहरी धुप की तरह
उन्मीद और गर्माहट से
भर कर मन को
कभी काली घटा छा जाती है
शीत और न - उम्मीदी की।
बहुत मुश्किल हो जाता है
फैसला करना
बीते पे रोये
या आने वाले को
उम्मीद से देखे।
जो वादे किये थे
पिछली जनवरी मे
और पूरे नहीं किये,
उनका मातम करे
या फिर नये वादे करे
खुद् से
कागज़ के पंने
पर लिख कर।
वो जो खुद को मालूम है
अधूरे रहेंगे
अगले दिसंबर भी..
दिसंबर के इन दिनों मे
मन के भाव भी
मौसम की तरह
बदलते रहते है
कभी शोख हो जाते है
सुनहरी धुप की तरह
उन्मीद और गर्माहट से
भर कर मन को
कभी काली घटा छा जाती है
शीत और न - उम्मीदी की।
बहुत मुश्किल हो जाता है
फैसला करना
बीते पे रोये
या आने वाले को
उम्मीद से देखे।
जो वादे किये थे
पिछली जनवरी मे
और पूरे नहीं किये,
उनका मातम करे
या फिर नये वादे करे
खुद् से
कागज़ के पंने
पर लिख कर।
वो जो खुद को मालूम है
अधूरे रहेंगे
अगले दिसंबर भी..
26 dec 2016
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