Thursday, 2 February 2017

मैं ज़िंदा हू ? 181216

मैं ज़िंदा हू ? 181216


झूठ निकला वोह
मेरा विश्वास की
मर जाउगा मैं
तुम्हारे बिना
तुम्हारे बिछड़ जाने की
सोच भर से जो दिल
डूब सा जाता था
दड़क रहा है अब भी
सब चल रहा है
हमेशा की तरहा
सूरज निकलता है
रात ढलती है
दिनचर्या चलती है
जाने अनजाने चेहरों के बीच
कही तुम भी दिख ही जाते हो
आसपास
बात भी कर लेता हू
अकेले मे तुमसे
यू ही कभी रोक कर
पास बिठा कर
पर जिंदिगी का मोह
प्यार के वादो पर
भरी पड़ गया
मैं अभी भी ज़िंदा दीखता हूँ।


ललित 18 dec 2016

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