Monday, 6 July 2015

नाकामयाबी 050715

तेरा कुछ भी नहीं हो सकता
येही तो कहा था उसने
कितना सच
इतने साल पहले ही देख लिया था उसने
मेरी नाकामयाबी का मंज़र
और मैं सफ़र करता रहा
कहीं पहुंचे बिना
@lalit 5 july 2015


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