Tuesday, 1 December 2015

इक सफ़र के साथी 301115

हम साथ चले है
कभी एक रास्ते पर कभी अलग़
किसी जन्म में दोस्त बनकर
किसी जन्म मे दुश्मन
तुमने प्यार भी बहुत किया है मुझे
मैने हज़ारो दोखे भी खाये है
कितने ही सबक इकठे सीखे है हमने
आज जब तुम दोबारा मिले हो
बहुत से साल बीत गये है इस जन्म के
पर कुछ साँझा दिखा तो है
तुम्हे और मुझे
बातो मे, भावो मे
जो जनझोर रहा है अचेतन को
कि फिर मिलाया है नियति ने
एक और सबक सिखाने को
कुछ और आगे बढाने को
इस सफ़र मे पूर्णता की और
एक और प्रयास ,
कुछ अभी बाकी है
जो करना ही होगा
आज,अभी, इसी जनम मे
ताकि थम सके ये सिलसिला
हज़ारो जन्मों का।
@ललित ३० nov २०१५

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